I’m Khaki, Respect Me || मैं खा़की हूं,मेरा सम्मान करे

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I’m Khaki, Respect Me पूर्वाग्रहों के दायरे से बाहर निकालो….मैं खा़की हूं मेरा सम्मान करो…!!

पुलिसिंग की कहानी सदियों पुरानी है जो आमजन की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण का कार्य करती आई है …. अलग-अलग काल खंड में इसे अलग-अलग नाम से पुकारा गया…. भारत में आधुनिक पुलिस की शुरुआत बंगाल के तात्कालिक गवर्नर जनरल लार्ड कार्नवालिस के समय 1793 में हुआ जिसमें जिला स्तर पर दारोगा पदनाम से अधिकारी तय हुआ …. पुलिस का काम गश्त करना यानी (पैट्रोलिंग करना) और ग्रासरूट स्तर पर अन्वेषण यानी (इन्वेस्टिगेशन) का काम करना था…

.1860 में भारतीय दंड संहिता यानी IPC-1860 और इसके सफल क्रियान्वयन के लिए 1973 में दंड प्रक्रिया संहिता यानी CRPC-1973 के तहत कानून व्यवस्था को बनाए रखना और अपराध नियंत्रण करना मूल उद्देश्य और लक्ष्य है…!!

I'm Khaki, Respect Me
I’m Khaki, Respect Me

.मैं खा़की हूं …चूंकि कानून व्यवस्था राज्य सूची का विषय है लिहाज़ा राज्य स्तर पर पुलिस का गठन किया गया है …. राजस्थान पुलिस भी राज्य की कानून व्यवस्था को बनाए रखने वाली गृहमंत्रालय के अधीन कार्यरत एक बहुत बड़ा संगठित मानव संसाधन हैं जो राज्य की अवधारणा के चार स्तंभों में से एक संप्रभुता के लिए समर्पित है…

राजस्थान पुलिस

राजस्थान पुलिस …”अपराधियों में भय, आमजन में विश्वास ” वाले ध्येय वाक्य के सहारे अपने कर्तव्य के प्रति अडिग और अविचल है…!!

I'm Khaki, Respect Me
I’m Khaki, Respect Me

होली-दीवाली, ईद-मुहर्रम, बैशाखी-लोहड़ी, रक्षाबंधन, नवरोज जैसे अनगिनत त्योहारों पर अपने घर से दूर यह खा़की इसलिए मुस्तैद नज़र आती है कि हर घर खुशियां फैले….अपने परिवारजनों और रिश्तेदारों से तो बस सालभर में एक आध बार ही मुलाकात हो पाती है….

सब की खुशामदी की बतियागिरी होती है….

झूठी मुस्कान और खुशी का नक़ाब पहने ये चेहरे सामाजिक ताने-बाने के बीच रहकर भी कितने बेगाने होते हैं…. सीधी सी बात है खा़की पर जमने वाली गर्द, बलुई मिट्टी, कीचड़ दूर से थोड़ी दिखाई देती है ….

जब नजदीक से इनकी जिंदगी को देखेंगे तो पता चलेगा कि कितनी कठिनाई से भरी जिंदगी है जहां एक ओर खादी और सफ़ेदपोश राजनेताओं का दबाव है तो दूसरी ओर कानून की बंदिशें….. और इसके एक धुव्र पर कंधे पर गमछा डाले फटे-पुराने कपड़े पहने हाथ जोड़े न्याय मांगता आमजन….उसे थोड़ी पता है कि न्याय अदालतों में मिलता है….

.मैं खा़की हूं

उसे तो यह पता है कि ऊपर का कानून ऊपर वालों के लिए है आमजन के लिए तो यही खाकी समझाइश और सुलहगिरी के सहारे कर देगी वहीं न्याय है…. वैसे कानून की बारहखड़ी भी नहीं जानने वाला गांव देहात का एक किसान मजदूर तो न्यायालय की चौखट पर पूरी उम्र गुजार दे तो जाकर न्याय मिलता है जो या तो अधूरा होगा या फिर अन्याय … वैसे यह पूर्ण रूप से अन्याय ही माना जाएगा …. क्यों कि सुप्रीम कोर्ट भी यह मान चुका है कि न्याय में हुई देरी किसी अन्याय से कम नहीं।।

राजनेताओं और सामाजिक कंटकों के द्वारा लगाई आग को बुझाने में न जाने कितने पत्थर लाठियां खानी पड़ती है इनको ….न जाने कितनी रातें बिन सोए गुजारनी पड़ती है…न जाने कितनी बार जान पर बन आती है इसे शांत करने में…!!

कोरोना के इस दौर में तो इन्होंने जो अभूतपूर्व काम किया है वह शायद सामान्य समझ वाले लोगों की समझ से परे है…हर बार बदलती गाइडलाइंस की अनुपालना इन्हीं के द्वारा करवाई जानी होती है….चाह लॉक-डाउन के दौरान लोगों को प्रशासन द्वारा अनुमत आवश्यक सेवाओं के दायरे के भीतर रखते हुए ..मास्क और दो गज दूरी की अनुपालना हो…या बाजारों की नियंत्रित व्यवस्थाएं बनानी..

टीकाकरण

कंटेंटमेंट जोन के आदेश पर प्रशासन का सहयोग कर एरिया को सी़ज करना हो ….या फिर टीकाकरण में कम दवा अधिक आबादी से उपजी अविश्वास की खाई को पाटना और कानून व्यवस्था बनानी….सब जगह खुद के संक्रमित होने का खतरा बना रहता है…. बहुत बड़ी सजगता के बावजूद राज्य भर में सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने इस आपदा में अपनी शहादत दी है….!!

I'm Khaki, Respect Me
I’m Khaki, Respect Me

उपरोक्त वर्णित बातें आमजन की पहुंच से दूर है क्योंकि कि हम पूर्वाग्रह से ग्रसित समाज का हिस्सा है जो नुक्कड़- चौपाल में चंद वाचाल किस्म के लोगों से सुनी बात को पूरी हकीकत मान बैठे…. कि ….

  • पुलिस वाले चोर और रिश्वतखोर होते हैं।”
  • बिन पैसे के पुलिस वाले काम‌ नहीं करते हैं।” “पुलिस वाले से दोस्ती अच्छी न दुश्मनी।”

ऐसी ही अनेकानेक बातें बचपन से मैं निजी रूप से सुनता आया …. थोड़ा माना …. सोचा… थोड़ा विश्वास…. थोड़ा अविश्वास…. सही और ग़लत के आंकलन में जानकारियां जुटाई तो फिर आधा अधूरा सा पड़़ गया … अखबार की खबर में रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार करने वाली बात पर नुक्कड़ वाले ज्ञानी पुरुष ठीक लगे…. फिर कुछ पुलिसकर्मियों और अधिकारियो की बेदा़ग कहानी सामने आई तो मन में बड़ा सम्मान आया….!!

नुक्कड़ वाले ज्ञानी पुरुष का ज्ञान सच्चा था उदाहरण भी ठीक ही थे लेकिन…उसका एकतरफा ज्ञान था जो नकारात्मक ऊर्जा से भरा पड़ा था … संतुलित ज्ञान नहीं था…..उसकी सम्पूर्ण जानकारी 2-5 प्रतिशत भ्रष्ट पुलिसकर्मियों और अधिकारियो के इर्द-गिर्द घूमती जानकारी थी… लेकिन इस नकारात्मक ऊर्जा ने कर्तव्यनिष्ठ ईमानदार पुलिसकर्मियों और अधिकारियो की सकारात्मक ऊर्जा को दबा दिया…जो हकीकत थी उससे हमें दूर कर दिया…!!

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मैं खा़की हूं

भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ लगातार कार्यवाहियां हो रही है आप भी उनके भ्रष्टाचार को उजागर करने में मदद कीजिए लेकिन यह बेमानी होगा कि आप एक बड़े लवाजमे को नजरंदाज करने में लगे रहो …जो सच्ची निष्ठा और समर्पण भाव से सेवा कर रहे हैं..!!

आज की इस पोस्ट का उद्देश्य एक उदाहरण…


सवाईमाधोपुर जिले मानटाउन थानाप्रभारी कुसुम मीणा के द्वारा चैक पोस्ट से बाइक सवार युवक को रोकने पर उसकी परिवार के भरण-पोषण की मजबूरी के चलते रोजगार तलाश में निकलने की बात पर एक संवेदनशील व्यवहार जिसमें थानाप्रभारी ने युवक के घर पर बात कर हक़ीक़त जानकर अपनी पॉकेट मनी 700 रूपए देकर विदा किया… परिवारजनों की खुशहाली की कामना की …और जाने दिया अपनी रोज़ी जुटाने….!!

I'm Khaki, Respect
I’m Khaki, Respec

ज्ञातव्य रहे कि थानाप्रभारी कुसुम मीणा महज 5 वर्ष की आयु में अपने पिता का साया सदा के को दिया…. अपनी पढ़ाई प्राइवेट विद्यार्थी के रूप में पूरी की विवाह उपरांत B.Ed. …इसी दौरान दो बच्चे… जुनून और जज्बे से खेती किसानी करते हुए राजस्थान पुलिस उपनिरीक्षक (Raj police S.I.) में चयनित हुई….महिला सशक्तिकरण की राह पर चलती श्रीमती कुसुम मीणा ने अपनी सेवा के दौरान ऐसे ही अनेकों उदाहरण पेश किए हैं…!

हमारी सुरक्षा व्यवस्था में अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर इन पुलिसकर्मियों के लिए हम यही कहेंगे….

ध्यान दे अगर आप दुकानदार है या फिर आप किसी ऑफिस, मौल, वर्कशॉप के ऑनर है तो अपने शॉप पर अग्निसमन यंत्र यानि आग बुझाने का सिलेंडर जरुर रखे … इसमे सबसे बड़ी प्रोब्लम ये होती है की कहा से ख़रीदे, कैसे ख़रीदे 

“आपकी कर्तव्यनिष्ठा पर हमें फक्र है आप अनवरत अपनी सेवाएं देते रहे…जो दाग़ है वो धुलते रहेंगे…जो कालिख फैंक रहे हैं उन्हें नज़र अंदाज़ करो..हम फ़ूल खिला रहें हैं …बस यूं ही चलते रहो…!!”

असीम संवेदनाएं और दुआएं…!! ….✍️ मुकेश रणवाॅ

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