शौक बना मिशन

शौक बना मिशन तो लहलाह उठा सीकर “प्लांट बेबी”|”Plant Baby”

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Plant Baby सीकर की “प्लांट बेबी”… अभिलाषा रणवाॅ

वृक्षारोपण….
एक शौक से जुनून तक

Plant Baby
Plant Baby

कभी शौक रहा पौधारोपण

एक घटना ने जहां परिवार की पिता रूपी छत छीनी तो किशोरावस्था में खेलती-कूदती बेटी को प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन की ओर मोड़ दिया…. कभी शौक रहा पौधारोपण…. जो बाद में मिशन बना….और अब जीवन का लक्ष्य… जुनून और जज्बा बन गई…..अब तो जीवन-मरण पेड़ों के संग…..!!

आइए एक शौक से जुनून तक का सफरनामा देखें…. प्लांट बेबी से वृक्षारोपण आइकॉन तक का सफरनामा….

10 साल पहले 2011 में साहित्य और संस्कृति का विराट व्यक्तित्व यानी वटवृक्ष गिरा…. साहित्य व संस्कृति के प्रति अनुराग लिए बुद्धिजीवी वर्ग के लिए एक बड़ी क्षति हुई और उस वटवृक्ष की छांह तले पहल रहे नवांकुर वृक्ष बनने की चाह में मशगूल थे लेकिन यहां उपजी शून्यता ने एक अंधियारा पैदा किया…!!

परंतु वो कहते हैं ना….

“सृजन का बीज हूं मिट्टी में जाया हो नहीं सकता….” यानी जिस बीज मे जीवटता है वह मिट्टी में दफ़न होकर नष्ट नहीं होता है बल्कि अपने पैतृक गुणों के साथ पुरजोर कोशिश और संघर्ष से न केवल जीवन संचार करता है अपितु विराटता को और अधिक बढ़ाता है।

Plant Baby
Plant Baby

अमर शहीद लोठू जाट , क्षत्रिय शिरोमणि वीर तेजाजी सहित क्षेत्रिय संस्कृति और सभ्यता को कलमबद्ध करती क़रीब 70 छोटी बड़ी काव्य रचनाओं के लेखक श्री मनसुख रणवाॅ जो सीकर जिले के ख्यातनाम साहित्यकार रहे एक दुर्घटना में दिवंगत होने पर परिवार के सामने एक अंधियारा सा छा गया….पर हिम्मत और हौसले के सामने हरेक ज़ख्म भर जाते हैं बस सकारात्मक ऊर्जा संचार के जरिए श्रम की समिधा लगती रहे…!!

प्लांट बेबी”

डॉ मनसुख रणवाॅ की लाडो बिटिया अभिलाषा के लिए यह जीवन का सबसे कठिन दौर था जब वह अपने सपनों को पंख देने वाले पिता का साया सदा सदा के लिए दूर हो गया और पीछे रह गई अशेष यादें… उनके संस्कार… उनका संघर्ष…उनकी कालजई रचनाएं ..!!

रणवाॅ के सपनों को पंख देने मे मां दुर्गा देवी की जिम्मेदारियां दुगुनी हो गई…..जो पैसे पिता जी ने बिटिया की शादी के लिए उपहार में गाड़ी देने के लिए FD के रूप में जमा कराए थे …

सृजन में किसे शामिल करें..

अभिलाषा ने मां से संवेदनशीलता से बात कर सृजन के पुरोधा व्यक्तित्व पिताजी के पैसे को गाड़ी मोटर जैसे एशो-आराम की बजाए सृजन में ही खर्च करने की ठानी….. सृजन में किसे शामिल करें…. प्रकृति का संरक्षण व संवर्द्धन, योग-प्राणायाम से जीवन शैली बदलना, सामाजिक कुरीतियां का निवारण, महिला सशक्तिकरण, लेखन और पेंटिंग के जरिए सामाजिक ताने-बाने को बदलना ….ये सभी बेटी अभिलाषा के ज़ेहन में चल रहे थे … बहुमुखी प्रतिभा की धनी इस बेटी में पिता का सृजनशीलता वाला DNA सीधा ही उतर आया था …..

पिता के साथ प्रकृति की विविधता को महसूस करते बचपन को टटोला और तात्कालिक परिस्थितियों को देखा तो यह क्षेत्र सर्वाधिक चुनौती व विविधता लिए था जहां जरूरत थी जोश और जुनून की…वो दोनों ही अभिलाषा रणवाॅ में बाल्यकाल से ही भरपूर थे…. फिर क्या था इसी जुनून और जज्बे को थामे निकल गई प्रकृति को संवारने और सजाने…. !!

शौक बना मिशन 2
शौक बना मिशन 2

सीकर

सीकर के बीड़ में स्मृति वन बनाने की बात आई तो मां दुर्गा देवी के साथ मिलकर बेटी अभिलाषा रणवाॅ ने इस परिसर में पहला पौधा रोपण किया…. फिर दो शानदार पार्क जिनमें प्रकृति के रंगों की विविधता लिए करीब हजारों पौधे रोपित किए….

उनकी पौधे से वृक्ष बनने तक की लम्बी यात्रा … ड्रिप इरिगेशन से जल का किफायती उपयोग करना शामिल किया… शहर के सरकारी कार्यालयों से लेकर सड़क किनारे और डिवाइडरों को चयनित कर वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाया गया जिसमें दर्जनों कार्यालयों को इको-फ्रेंडली बना दिया…

अकेले ही शुरू किया यह पुनीत कार्य कारवां में तब्दील हो गया पता भी नहीं चला ….2019-20 तक लोगों के लिए प्रकृति प्रेमी इस बिटिया की उपस्थिति होना ही किसी वृक्षारोपण कार्यक्रम की सफलता की गारंटी बनने लगा …

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पिताजी के सृजनशील

पिताजी के सृजनशील व्यक्तित्व को अपने अंदर समाहित करते हुए बुजुर्ग माता-पिता सदृश्य स्वजनों से आशीर्वाद और भारत निर्माण में संलग्न युवा शक्ति को संबल प्रदान करते हुए हर हाथ लगे एक पौधा मिशन जो धीरे-धीरे जनांदोलन की ओर बढ़ रहा है….. ज्ञातव्य रहे कि राज्य सरकार के पूर्व पर्यावरण मंत्री श्री राजकुमार जी रिणवा ने बेटी के प्रकृति के प्रति लगाव व समर्पण को देख “प्लांट-बेबी” की संज्ञा दी…!!

इस वर्ष डाइबिटीज से प्रभावित लोगों को बचाने के लिए औषधीय गुण वाले जामुन के 30-35 हजार पौधे राज्य के विभिन्न जिलों में लगाए गए….2012-13 में वृक्षारोपण का यह मिशन अपने 8 वर्ष पूर्ण करने को है जहां अभिलाषा रणवाॅ के निजी व सार्वजनिक प्रयासों से करीब एक लाख पौधे लगाए जा चुके हैं….!!

निश्चित रूप से प्रकृति को समर्पित यह महिला सशक्तिकरण की दोहरी भूमिका अदा करती अभिलाषा रणवाॅ वर्तमान समय में मानवता को संबल देने में अहम भूमिका निभा रही हैं…जब प्राण वायु के लिए हमें कृत्रिम ऑक्सीजन प्लांट स्थापना की ओर चलने की जरूरत पड़ी है वह कोई स्थाई समाधान नहीं हो सकता है…..

अभिलाषा रणवाॅ

अभिलाषा रणवाॅ का मानना है कि यदि हम अपने घर और इसके आसपास के खाली क्षेत्र में हर हाथ लगे एक पौधा मिशन के तहत काम कर गये तो जीवन सरल सहज और निरोग होगा..!!

अपने दिवंगत पिता और मां को प्रेरणा का मूल स्रोत मानने वाली अभिलाषा रणवाॅ राजस्थान के प्रथम पर्यावरण वैज्ञानिक रूपी संत गुरू जाम्भोजी व उनके सम्प्रदाय से आती अमृता देवी विश्नोई के बलिदान को अनुकरणीय मानती है और वर्तमान मे प्रकृति प्रेम को समर्पित अनेकों व्यक्तित्वों से अभिप्रेरित है जिनमें चिपको आन्दोलन के प्रणेता सुन्दर लाल बहुगुणा और मेघा पाटकर जैसे लोग अग्रिम पंक्ति को सुशोभित करते हैं…।

आइए प्रकृति के आधार बने

इन वृक्षों का संरक्षण और संवर्धन करें…. सीकर की “प्लान्ट-बेबी” अभिलाषा रणवाॅ के हाथों को मजबूत करें……”हर हाथ लगे एक पौधा” थीम को जनांदोलन में तब्दील करें….. आपदा में अवसर ढूंढ़े और कोरोना की सांसों पर बंदिशें लगाती बिमारी का मुकाबला कृत्रिम ऑक्सीजन प्लांट की बजाय वृक्षारोपण से स्थायी ऑक्सीजन प्लांट स्थापना के लिए आगे बढ़ें….।

बहुमुखी व्यक्तित्व लिए अभिलाषा रणवाॅ के व्यक्तित्व का एक अंशः कलमबद्ध करने में आज कलम बड़भागी महसूस कर रही है… !!
बाकी अगले पार्ट में….

शुभाशीष….. अभिलाषा !!

ध्यान दे अगर आप दुकानदार है या फिर आप किसी ऑफिस, मौल, वर्कशॉप के ऑनर है तो अपने शॉप पर अग्निसमन यंत्र यानि आग बुझाने का सिलेंडर जरुर रखे … इसमे सबसे बड़ी प्रोब्लम ये होती है की कहा से ख़रीदे, कैसे ख़रीदे 

….✍? मुकेश रणवाॅ

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