भारतीय समाज में सोशल डिस्टेंसिंग || social distancing in indian

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भारत में सोशल डिस्टेंसिंग

social distancing in indian भारत में सोशल डिस्टेंसिंग रग-रग में समाई है….‘सोशल डिस्टेंसिंग’ को भारतीय जनमानस जिन अर्थों में ग्रहण करता है, उसके पीछे लम्बी सामाजिक – ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है ……यह शब्द सदियों से वर्चस्व बनाए रखने के लिए इस्तेमाल होता रहा है….. ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ हमेशा ताकतवर समूह द्वारा कमजोर समूह पर थोपी गई अवधारणा है….. भेदभाव और दूरी बनाए रखने और अस्पृश्यता को अमल में लाने के तरीके के तौर पर इसका इस्तेमाल होता रहा है….!!

फ्रासिंसी विचारक लुई दुमो की [होमो हय्रार्किक्स ] मेंsocial distancing in indian के बारे में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है जिसके अनुसार यह पवित्र और अपवित्र की धार्मिक धारणा का सामाजिक जीवन में विस्तार है …..

वास्तव में देखा जाए तो “social distancing in indian” का COVID -19 बीमारी से कोई सीधा सम्बन्ध नही है.. संक्रामक बीमारियों में संक्रमण से बचने हेतु इस अवधारणा का प्रयोग किया जाता रहा है… यानी बीमार व्यक्ति के शरीर से दूर रहो …. अपनी बीमारी दुसरे को मत दो, दुसरे की बीमारी आप मत लो ….

इस शब्द का प्रयोग समाज के शक्ति सम्बन्धों को समझाने के लिए किया जाता है… जो हमेसा प्रभुत्व को रेखांकित करता है …

social distancing in indian

भारतीय समाज व्यवस्था का हिस्सा रहा है इसकी जड़े समाज शास्त्र के विकास के समय से है ….

भारतीय समाज में वर्ग भेद – ऋग्वेदिक काल में हुआ जहा समाज में उंच -नीच की सामाजिक दुरी बनी … धीरे धीरे ये वर्ग जातियों में तब्दील हो गये जो शुरुवात में पैसा आधारित थे लेकिन धीरे -धीरे जन्म आधारित हो गये ….यहा “सोशल डिस्टेंसिंग” जाति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अधिक मजबूती से खड़ी नजर आई …

इसमे शादी, खाने – पिने से लेकर छुने तक जिस ‘सोशल डिस्टेंसिग’ का क्रूरतम रूप सामने आता है… उच्च वर्ग द्वारा निम्न वर्ग के साथ सामूहिक भोज व वैवाहिक सम्बंद से ..सोशल डिस्टेंसिग ….”””

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social distancing in indian
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देशभर में ब्राहणवाद के चलते पानी से लेकर सार्वजनिक स्थलों , मंदिरों और कइ जगहों पर रेस्टोरेंट और आटा चक्की तक पर अछुतो /दलितों के साथ ‘social distancing in indian ‘का व्यवहार किया जाता था जो समय समतामूलक समाज की परिकल्पना लिय सविधान के बस की बात नही की इस सामाजिक दुरी को कम कर दे ….

उच्च जातियों के लोग इस महामारी के दोरान ‘सोशल डिस्टेंसिग’ के सूत्र से लोगों के सामने जाति -व्यवस्था के औचित्य का तर्क रखने लग गए है ….ये तर्क बार बार आ रहा है की ना छूकर किया जाने वाला अभिवादन ….यानी हाथ जोड़कर दूर से किया जाने वाले नमस्ते, भारतीय परमपरा की श्रेष्ठता को दर्शाता है … हालाँकि यहाँ अभिवादन में प्रयुक्त शब्दों में भी सामाजिक दुरी लिए एक स्पस्ट भेद नजर आता है …. चरण स्पर्श भी उसी भारतीय संस्कृति की परम्परा का हिसा है…समाज लोगों के बिच गले मिलाने यानी आलिंगन की भि परम्परा है …हालाँकि इसका दायरा सिमित नजर आता है

पितृसत्ता की सोशल डिस्टेंसिंग

परिवार के अन्दर भी स्त्री और पुरुष के बिच एक social distancing in indian सिंग बनाई गई है ताकि स्त्री को कमजोर होने का अहसास दिलाकर उसका शोषण किया जा सके ….स्त्री के लिए सोशल डिस्टेंसिंग इस तरह से की गई है की वह घर से बाहर ना निकल सके…. उससे अपेक्षा की जाती है की वह किस व्यक्ति से बात करे व किससे ना करे …..

यहाँ तक social distancing in indian की गई है की वह परिवार के लोगों के सामने अपने पति से भी दुरी बनाये रखती है उसका नाम तक जुबान पर नहीं लाना है बल्कि एक दुसरे से सम्बंधित करते हुए रिश्ते का जिक्र कर पाए …विशिष्ट स्थिति तो तब बन जाती है जब रजस्वला स्त्री को मासिक धर्म की अवधि के समय social distancing in indian के तहत खाना बनाने और परोसने से लेकर मंदिर प्रवेश से भी सामाजिक दुरी बनाये रखने के लिये कठोरता से अमल में लाया जाता है …..

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में भी राजा और प्रजा के बीच भी ‘social distancing in indian’ दिखती हैं जहां राजा सिंघासन पर बैठे या विशिष्टता लिए देवपुत्र के रूप में पेश किया गया था और आम जनता सोशल डिस्टेंसिंग लिए नजर झुकाए आज्ञाकारिता भाव में……. वर्तमान में गरीब और अमीर के बीच भी दूरी बनाई जाती है जहां सत्ता द्वारा उनके यहां विशेष अनुराग और जनता के लिए बेरूखी…..जो २-३% अमीरों को ९७-९८% जनसामान्य के बीच पूंजी का भेदभाव लिए सामाजिक दूरी पैदा करती है….!!

social distancing in indian
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सामाजिक संबंध इसी से निर्धारित होते है की किसकी हैसियत क्या है …

यह समाज से लेकर शिक्षण संस्थान तक और वहा की वास्तविक स्थिति लगभग इसी के इर्द गिर्द घुमती नजर आती है…. ये सारी बाते सोशल social distancing in indian तय कर देती है …मजदुर व निम्न वर्ग के लिए गावो और शहरों में अलग बर्तन रखना एयर दहलीज के बाहर याचक भाव में रखना ताकि सोशल डिस्टेंसिंग बराबर बनी रहे ..

सोचानिय विषय है जिस देश में जाती, धर्म, लिंग, क्षेत्र, भाषा, आर्थिक स्थिति आदि के आधार पर सामाजिक दुरी बना ली जाती है जिसकी जड़े गहरी है जो रूढ़ीवाद से पोषित है …..

सविधान

सविधान और वैश्विक चिंतन लिए सकारात्मक सोच जैसे कुछ टिके इस सोशल डिस्टेंसिंग जैसे रावण को हराने के लिए आजादी के 7 दसक बाद बेबस और लाचार भाव से अपनी किंचित जद्दोजहद के साथ खड़े नजर आ रहे है …..

एक एसी मानसिक और बोधिक क्षमता लिए समानता, तर्क, विवेक और न्याय जैसी तमाम धारणाओं पर आधारित हो अन्याय और भेदभाव आधारित अवधारणाओ के खिलाफ हो वह ही न्यायमूलक समाज के स्थापना कर पाएगा …..

व्यक्तिगत प्रयास के तोर पर हम वैज्ञानिक दृष्टीकोण और मानवतावाद के आधार पर अपने बुद्धि कोसल को लगाना होगा ताकि एक वैज्ञानिक विवेचन लिए प्रबुध्द समाज निर्माण हो सके जहा मानवीय मूल्यों के प्रति संवेदन्शीलता हो …….

ध्यान दे अगर आप दुकानदार है या फिर आप किसी ऑफिस, मौल, वर्कशॉप के ऑनर है तो अपने शॉप पर अग्निसमन यंत्र यानि आग बुझाने का सिलेंडर जरुर रखे … इसमे सबसे बड़ी प्रोब्लम ये होती है की कहा से ख़रीदे, कैसे ख़रीदे …….तो इसका लिंक दिया गया जहा से आप इसे खरीद सकते हो

…. ✍? मुकेश रणवाॅ

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